एक हजार सद्भावना सम्मेलन आयोजित करेगी जमीयत ,देवबंद में ऐलान

स्टाफ रिपोर्टर। Twocircles.net
सहारनपुर के देवबंद में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद का दो दिवसीय सम्मेलन शनिवार को सुबह से शुरू हो गया है। सम्मेलन में देशभर से हजारों की संख्या में मुस्लिम धर्मगुरु और मुस्लिम बुद्धिजीवी पहुंचे हैं। सम्मेलन के पहले दिन के सत्र में इस्लामोफोबिया के खिलाफ आवाज़ उठाने पर सबकी सहमति बनी है। इसके अलावा सम्मेलन में ऐलान किया गया कि जमीयत देशभर में सद्भावना और शांति के लिए 1000 सद्भावना संसद का आयोजन करेंगी।
दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने शायरी के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। अपने संबोधन के दौरान मौलाना महमूद मदनी भावुक भी हो गए। उन्होंने संबोधन में कहा कि, "बेइज्जत होकर ख़ामोशी से जीना मुसलमानों से सीखे। हम तकलीफ बर्दाश्त कर लेंगे लेकिन देश का नाम खराब नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि अगर जमीयत उलेमा शांति को बढ़ावा देने और दर्द, नफरत सहन करने का फैसला करते हैं तो ये हमारी कमजोरी नहीं, ताकत है।"
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि, " देश में नफरत का कारोबार करने वालों की दुकानें ज्यादा दिन तक चलने वाली नहीं है। नफरत की दुकान खोलने वाले और नफरत का बाजार सजाने वाले लोग देश के दुश्मन हैं। नफरत का जवाब कभी नफरत नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि नफरत का जवाब हम भी नफरत से दे सकते हैं लेकिन देश का मुसलमान कभी ऐसा नहीं करेगा। ना पहले कभी ऐसा किया है और ना ही कभी ऐसा करेंगे। क्योंकि हम नफरत का जवाब मुहब्बत से देने वाले लोग हैं"। 
पूर्व राज्यसभा सांसद रहें मौलाना मदनी ने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि, " अखंड भारत बनाने की बात करने वालों ने आज देश के मुसलमानों का रास्ते पर चलना मुश्किल कर दिया है। यह किस अखंडता और अखंड भारत की बात करते हैं, उन्होंने कहा कि नफरती लोग देश के साथ दुश्मनी कर रहे हैं और देश के अमन शांति तथा यहां की गंगा जमुनी तहजीब को तबाह बर्बाद कर रहे हैं। मौलाना मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि हमें सबसे ज्यादा प्यार इस देश की शांति से है। इसलिए हम राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र मजबूत करने की बात करते हैं।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेशनल सेक्रेटरी मौलाना नियाज़ अहमद फारूकी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ," आज हमारा देश धार्मिक नफ़रत में जल रहा है और युवाओं को इस आग की ओर बढ़ाया जा रहा है। इस्लामी सभ्यता और संस्कृति के खिलाफ निराधार बेबुनियाद बातों को फैलाया जा रहा और सत्ता में बैठे लोग इन सबका समर्थन कर रहे हैं। राजनीतिक फायदे के लिए देश के बहुसंख्यक समाज को अल्पसंख्यकों के विरुद्ध उत्तेजित करना देश के साथ दुश्मनी है"। 
मौलाना नियाज़ अहमद फारूकी ने कहा कि , " देश की सत्ता ऐसे लोगों के पास हैं, जो देश की सदियों पुरानी भाईचारे की पहचान को ख़त्म करना चाहते हैं"।
सम्मेलन में दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि, "हिंदुस्तान एक ऐसा चमन है, जिसमें हर धर्म, नजरिया व संस्कृति के लोग एक साथ आपस में प्यार मोहब्बत से रहते रहे है। लेकिन आज एक अजीब सा माहौल बनाकर देशवासियों को बांटने का षड्यंत्र रचा जा रहा है, जो कि देश की तरक्की के लिए नुकसानदायक है"।
जमीयत उलमा-ए-हिंद पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की ममता सरकार में मंत्री मौलाना सिद्दीकउल्ला चौधरी ने कहा कि , "मुल्क को बचाने में जमीयत ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं। जमीयत के साथ मिलकर हिंदुस्तान के संविधान को बचाने का काम करें"।
सम्मेलन के पहले दिन जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से इस्लामोफोबिया को लेकर भी प्रस्ताव भी पेश किया गया। इस प्रस्ताव में इस्लामोफोबिया और मुस्लिमों के खिलाफ उकसावे की बढ़ती घटनाओं का जिक्र किया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि 'इस्लामोफोबिया' सिर्फ धर्म के नाम पर शत्रुता नहीं, इस्लाम के खिलाफ भय और नफरत को दिल और दिमाग पर हावी करने की मुहिम है। प्रस्ताव में कहा गया कि सभी धर्मों के बीच आपसी सद्भाव और शांति का संदेश देने के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रायोजित 'इस्लामोफोबिया की रोकथाम का अंतरराष्ट्रीय दिवस' हर साल 14 मार्च को मनाया जाए।
इसके अलावा एक अन्य प्रस्ताव लाया गया कि 2017 में प्रकाशित ला कमीशन की 267 वीं रिपोर्ट में हिंसा के लिए उकसाने वालों के लिए कानून बनाने की सिफारिश की गई थी। प्रस्ताव में कमीशन की इस सिफारिश पर तुरंत क़दम उठाने को जरूरी बताया है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि कानून में सख्त सजा दिलाने का भी प्रावधान लाया जाए। 
मौलाना महमूद मदनी की अध्यक्षता में हो रहें सम्मेलन में दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम, जमीयत उलमा हिंद पश्चिम बंगाल अध्यक्ष और ममता सरकार में मंत्री मौलाना सिद्दीकउल्ला चौधरी, सांसद मौलाना बदरूद्दीन अजमल और सभी प्रदेशों के अध्यक्षों समेत देशभर के उलेमा और मुस्लिम बुद्धजीवी शामिल हुए हैं।
